सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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२४८ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
ज्यों मृतिका घट नीर तरंग हि,
बादल व्योम सु व्योम जु भूता ॥
वृक्ष सु वीज है वीज सु वृक्ष है,
पूत सु वाप है वाप सु पूता ।
वस्तु विचारत एक हि सुन्दर,
ताने रु बानै तौ देखिये सूता ॥६॥
भूमि हु चेतनि आपु हु चेतनि,
तेज हु चेतनि है जु प्रचंडा ।
वायु हु चेतनि ब्योम हु चेतनि,
शब्द हु चेतनि पिंड ब्रह्माण्डा ॥
है मन चेतनि बुद्धि हु चेतनि,
चित्त हु चेतनि आहि उडंडा ।
जो कछु नाम धरै सौई चेतनि,
चेतनि सुन्दर ब्रह्म अखंडा ॥७॥
एक अखंडित ब्रह्म बिराजत,
नाम जुदौ करि विश्व कहावै ।
एक ई ग्रंथ पुरान बखानत,
एक ई दत्त बसिष्ठ सुनावै ॥
एक ई अर्जुन उद्धव सौ कहि,
कृष्ण कृपा करिकै समुझावै ।
सुन्दर द्वैत कछू मति जानहु,
एक ई ब्यापक बेद बतावै ॥८॥