सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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ान का अंग ॥ । २८३
ग ज्ञानं को अंग
३१॥
ष ६८
गढ़ गवत,
नहीं कुलवानो ।
नि दीमन,
से नव नारी ।
अगन्तरि,
मनवारी ।
पें यर,
ती न्यारी ॥१॥
तरि,
ंतवारी ।
च,
यारी ॥
री ।
री ॥२॥
हृदय में ।