सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
नासिका गये तै कहा नासिका सुगन्ध लेत,
मुख के गये तै कहा मुख ऐसै गाइ है ॥
हाथ के गये तै कहा हाथ ऐसौ काम होत,
पाव के गये तै ऐसै पाव कत धाइ है ।
याहि तै बिचारि देखि सुन्दर कहत तोहि,
देह के गये तै ऐसी देह नही आई है ॥५॥
बार बार कह्यौ तोहि सावधान क्यौ न होहि,
ममता की पोट सिर काहे कौं धरतु है ।
मेरो धन मेरो धाम मेरे सुत मेरी बाम,
मेरो पशु मेरो ग्राम भूलौ यौ फिरतु है ॥
तौ भयौ बावरौ बिकाई गई बुद्धि तेरी,
ऐसौ अन्धकूप गृह तामै तू परतु है ।
सुन्दर कहत तोहि नैक हू न आवै लाज,
काज कौ बिगारि कै अकाज क्यौ करतु है ॥६॥
(४) अबल उस्ताद-आदि जगद्गुरु । कदम की खाक-
पैरो की धूल । हिरस बुगुजार-कामना छोड । फैना-छल
कपट । जान का जान-प्रणो का प्राण । जिंद का जिंद-
जीवन का जीवन । सखुन का सखुन-सब सारो सार ।
(६) बाम-वामागना, स्त्री । नेक-थोडी सी भी । काज-
कार्य । अकाज-अकार्य ।