सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ उपदेश चितावनी को अङ्ग ॥ [ ६५
आब की बूंद औजूद पैदा किया,
नैन तन मानिषा रंगि सजूती ।
ख्याल मैला भये उरी लीये फिरै,
जानि कै दोप बग करै सूती ॥
भूलि उस खसम को काम नै क्या किया,
बेगिले यादि करि मति निपूती ।
दास सुन्दर कहै गर्व गुल नौ रहे
भी तुही ना तुही बोल नूती ॥३॥
श्रवन उस्ताद के कद्म की खाक हौ,
दिग्म दुयजार सब छाडि फैना ।
यार दिलदार दिल माहिं तू याद कर,
है तुझी पास तू देखि नैना ॥
जान का जान है, जिद का जिद है,
सपुन का सपुन कछु समझि सैना ।
दास सुन्दर कहै मकान घट मै रहै,
एक तू एक तू बोलि मैना ॥४॥
मनहर छन्द
कान के गए तै कहा कान ऐसो होत मूढ,
नैन के गये तै कहा नैन ऐसे पाइ है ।
(३) आब-पानी । औजूद-अद्भूत शरीर । करि सजूती-
लगाकर । ख्याल-विचार । खसम-स्वामी परमेश्वर ।