सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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२१४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
कोउ कहै यह ऐसैं ही होत है,
क्यौं कर मानिये बात अनिष्टी ?
सुन्दर एक किये अनुभे बिनु,
जान सकै नहिं बाहिर दृष्टि ॥१२.।
कोउ तौ मोक्ष अकास बतावत,
को कहै मोक्ष पताल के माहीं ।
कोउ तौ मोक्ष कहै पृथवी पर,
कोउ कहै कहु और कहा ही ॥
कोउ बतावत मोक्ष शिला पर,
को कहै मोक्ष मिटै पर छाही ।
सुन्दर आतम के अनुभे बिनु,
और कहूं कोउ मोक्ष ही नाही ॥१३॥
मूये तै मोक्ष कहै सब पण्डित,
मूये तै मोक्ष कहै पुनि जैना ।
मूये तै मोक्ष कहै रिषि तापस,
मूये तै मोक्ष कहैं शिव सेना ॥
(१२) ईश्वर तिष्टी-ईश्वर निर्मित । अनिष्टी-
तुचित । (१३) मोक्ष शिला-जैन सम्प्रदाय मे अभिमत
न्व अवस्था ।