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सर्वकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 222

॥ आतम अनुभव को अंग ॥ [ २१३
इन्द्रव छंद
श्रोत्र न जानत चक्षु न जानत,
जानत नाहि जु सूघत घ्रानै ।
ताहि सपर्श त्वचा न सकै पुनि,
जांनन नाहि न जीभ बखानै ॥
ना मन जानत बुद्धि न जानत,
चित्त अह कहि क्यों पहिचानै ।
शब्द हु सुन्दर जानि सकै नहिं,
आतमा आपुकौ आपु ही जानै ॥१०॥
सूर के तेज तैं सूरज दीसत,
चंद के तेज तैं चंद उजासै ।
तारे के तेज तैं तारे उ दीसत,
वीजुरि तेज तै विज्जु चकासै ॥
दीप के तेज तै दीपक दीसत,
हीरे के तेज तैं हीरो ऊ भासै ।
तैसे ही सुन्दर आतम जानहु,
आपु के तेजतैं आपु प्रकासै ॥११॥
कोउ कहै यह सृष्टि सुभाव ते,
कोउ कहै यह कर्म तै सृष्टी ।
कोउ कहै यह काल उपावत,
कोउ कहै यह ईश्वर तिष्टी ॥