सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
अनेक कहै जौ कोऊ अनेक आभासै ताहि,
जाकै जैसौ भाव ताकौ तैसौ ई विसेखिये ।
बचन बिलास कोऊ कैसे ही बखान कहौ,
व्योम मांहि चित्र कहू कैसे करि लेखिये ।
अनुभै किये तैं एक दोइ न अनेक कछु,
सुन्दर कहत ज्यौ है त्यौ ही ताहि पेखिये ।७॥
बचन ई बेदबिधि बचन ई शास्त्र पुनि,
बचन ई स्मृति अरु बचन पुरान जू ।
बचन ई और ग्रन्थ बचन ई व्याकरन,
बचन ई काव्य छंद नाटक बखान जू ॥
बचन ई सस्कृत बचन ई पराकृत,
बचन ई भाषा सब जगत मैं जान जू ।
बचन कै परै सु बचन माहि आवै ना हे,
सुन्दर कहत वह अनुभौ प्रमान जू ॥८॥
इन्द्रिय नहिं जानि सकै अल्प ज्ञान इन्द्रीन कौ,
प्रान हू न जानि सकै श्वास आवै जाइ है ।
मन हू न जानि सकै सकल्प विकल्प करै,
बुद्धि हू न जानि सकै गुनि सौ वताइ है ॥
चित्त अहकार पुनि दोऊ नहि जानि सकै,
शब्द हू न जानि सकै अनुमान पाइ है !
सुन्दर कहत ताहि कोऊ नहि जानि सकै,
दीवा कर देखिये सु ऐसी नहि लाइ है ॥६॥