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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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उपसंहार वर्णन ४३५
अन्तर से फिर ग्रहण हो सकता है ।
ग्रहात् पुनः प्रग्रहणान्तरं स्यात्ततस्तताभिरिति क्रमेण
पातर्क शीतां श्वधिमासविद्भि र्ज्ञेया ग्रहाद्या दशवत्सरान्तम् । ४५ ।
उसके बाद पुनः १५,१६५ आदि तिथि में इस प्रकार दस वर्ष में पुनः ग्रहण
हो सकता है । यह राहु, चन्द्र, रवि तथा अधिमास के द्वारा समझा जा सकता
है ।
ताराग्रहाणां समतैक वर्षे न स्याद्यतस्तद् बहुपञ्जिकानाम् ।
कार्यों बुधैः संग्रह एवमन्य कार्याणि सिद्धन्त्यपि साधुताभ्यः । ४६ ।
एक वर्ष में तारा ग्रहों (मंगल आदि) की समता नहीं आने के कारण (एक
भगण पूर्ण नहीं होने के कारण) गणित पण्डितों को बहुत वर्षों की पञ्जिका रखनी
चाहिये । इन पंजिकाओं से अनेक उपयोगी काम किये जा सकते हैं ।
सौरेण मानेन रदा (३२) ब्दतः प्राग् यथा कुजः सोऽ पि तथैष्ट वर्षे
चक्रे खनागेन्दु (१८०) कला भराढ्य एकादिराश्यन्त रितस्तु सूर्यात् । ४७ ।
वर्तमान सूर्य वर्ष के जिस मास के जिस दिन का मंगल स्फुट राशि आदि
जितना है उस दिन के ठीक ३२ वर्ष पूर्व उस मास के उसी दिन मंगल का स्फुट
राशि आदि वही था । (३२ वर्ष बाद भी वही होगा) वह सूर्य से १२ राशि पर
रहनें पर १८० कला जोड़ना पड़ेगा ।
युतः कलादि र्दश ताड़िताभिः
कुबाहुभि (२१०) भै (२७०) रसवीतिहोत्रै (३६०) ।
गजाब्धिभिः (४८०) वह्नि रसैः (६३०) कुनागैः (८१०)
स्ताभिः पुनः कार्मुक पञ्चकस्थे । ४८ ।
सूर्य से १,२,३ आदि राशि के अन्तर पर मंगल रहने पर क्रमशः २१०, २७०,
३६०, ४८०, ६३० तथा ८१० कला मंगल में जोड़ना पड़ेगा । मंगल धनु से आरम्भ
कर पांच राशियों में रहने पर
तस्मिन् क्रमात्यञ्चदशा (१५) ष्ट (८) पंच (५)
मातंग (८) तिथ्यं (१५) श समन्विता भिः ।
युग्मादि पञ्चर्क्ष गते तदंश (१५।८।५।८।१५।)
हीनाभिरे वं स्फुटता मुपैति । ४९ ।
क्रमशः १५,८,५,८,१५ अंश मंगल से घटाना पड़ेगा । इससे ३२ वर्ष बाद
मंगल स्फुट हो जायेगा ।
विश्वा (१३) ब्दतः प्राक् शशिजो यथा भूतथेष्ट वर्षेऽ त्र कियान् विशेषः
गत्यन्तरेण स्फुट सौम्य मध्य भान्वोर्वसु (८) ध्नाग्नि (३) हृतेन चेषः । ५० ।
इष्टवर्ष के इष्ट सौर मास तथा इष्ट दिन का बुध का राशि आदि वही होगा