सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 531, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 531

४३४ सिद्धान्त दर्पण
चन्द्र और सूर्य ग्रहण की सम्भावना जानने के लिए चन्द्र और सूर्य का स्फुट
राशि आदि निकालना होगा । उसके लिए पूर्णिमा या अमावास्या (चन्द्र या सूर्य
ग्रहण में ) का अहर्गण निकाल कर उसे बार शुद्ध करेंगे ।
पातं स्वगत्या (३।१०।४८) परिकल्प्य पाता
तद् भार्द्धतो वाग्निकु (१३) भाग मध्ये
पक्षान्तजेऽर्क स्थित एव चन्द्र
ग्रहो भवेत्तत् क्रम भक्त पूर्वः । ४० ।
इस अहर्गण को दैनिक ३।१०।४८ कला गति से गुणा कर चन्द्र पात (राहु)
की राशि ज्ञात होगी । अमान्त में सूर्य और पात से ६ राशि बाद की दूरी तथा
पूर्णिमान्त में स्फुट चन्द्र और पात के बीच की पूरी १३ अंश से कम होने पर ग्रहण
की सम्भावना रहती है । चन्द्र ग्रहण के बारे में पहले कहा जा चुका है ।
दर्शान्त काले क्रमतस्तु पूर्व पश्चान्नति त्र्यश विहीन युक्ते
तात्कालिक ग्लौदिगिषोस्त्रिभोन तनू नतज्या खरसां (६०) शकस्य । ४१ ।
[L1