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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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४३६ सिद्धान्त दर्पण
जो उससे ठीक १३ वर्ष पूर्व उसी मास के उसी दिन था । इस विषय में और
भी कई बाते हैं । स्फुट बुध और मध्यासूर्य के गति अन्तर को ८ से गुणा कर ३
से भाग दें ।
युतोनितः सूर्य गतेः ५९।८ स्वभुक्ति न्यूनाधिकत्वे सतु वक्रगश्चेत् तदात्मभास्वद्
गति योग नाग (८) घाताग्नि (३) भागेन युतः स्फुटः स्यात् । ५१ ।
बुध की गति, ५९।९ से कम या अधिक होने पर इस फल को बुध के राशि
आदि में जोड़ेगे या घटायेंगे । बुध वक्री होने पर स्फुट बुध और मध्यम सूर्य की
गति योग को इसी प्रकार ८ से गुणा कर ३ से भाग देकर फल को वक्र बुध में
जोड़ने से बुध स्फुट होगा ।
वृहस्पतिर्द्वादश वर्षतः प्राग्
यथा यथा स्वार्क कलान्तरस्य
खार्काशं (१२०) युग्भिः खकुदृक् (२१०)
कलाभि स्ताभिः पुनः कर्कट पञ्चकस्थे । ५२ ।
वृहस्पति १२ वर्ष पहले जो था वही होगा । गुरु और सूर्य की अन्तर कला
को १२० से भाग देकर फल को २१० कला में जोड़े । योग को वृहस्पति में जोड़े ।
पुनः वृहस्पति कर्क आदि ५ राशियों में होने पर
तस्मिन् सुधांशो (३३) घन (१७) रुद्र (११) मेघ (१७)
देवांश (३३) हीना भिरिहैव नक्रात्
भपञ्चकस्थे तुतदंश (३३।१७।११।१७।३३) युग्भिः
समन्वितः सन् स्फुटतां प्रयाति । ५३ ।
रवि और गुरु के अन्तर को क्रमशः ३३, १७,११,१७ और ३३ से भाग देकर
फल को उस अन्तर से घटाकर शेष को वृहस्पति में जोड़ेगे । वृहस्पति मकर
आदि ५ राशियों में रहने पर इस अन्तरफल को २१० कला में योग कर उसे पुनः
गुरु से जोड़ने से वृहस्पति स्फुट होगा ।
वर्षाष्टकात् प्राग् भृगुजो यथैव मिष्टाब्दके सौर दिने च तत्र
स्फुटस्व भुक्त्यर्थम मध्य भुक्त्यन्तरेण बाण (५) घ्न भुजो (२) हृतेन । ५४ ।
इष्ट और वर्ष मास और दिन में शुक्र की राशि जो होगी वही ठीक आठ
वर्ष पहले उसी मास और उसी दिन थी । शुक्र स्फुट गति और सूर्य की मध्यम
गति के अन्तर को ५ से गुणा कर २ से भाग देंगे ।
ऊनो युते भानुगतेः स्वभुक्तो न्यूनाधिकायां क्रमतोऽ नृजुश्चेत्
युत्याशर (५) घ्नाक्षि (२) हतस्वभास्वद्
गत्यास्तदोनः स्फुटतां संगच्छेत् । ५५ ।
सूर्य मध्यम गति ५९।८ से स्फुट शुक्र गति कम या अधिक होने पर इस