सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विंशः प्रकाशः
उपसंहार वर्णन्
कौतुक पञ्जिका विधानम्
उपक्रमः स्वेष्टतमस्य विष्णोः स्तवादिनादौ रचितश्रुतस्य
तत्पादनत्योपनतस्य पूर्ति मथोप संहार ममुष्य कुर्वे । १ ।
मैंने अपने इष्टतम देव श्री जगन्नाथ (विष्णु) का स्तवन कर इस ग्रन्थ का
आरम्भ किया था । अन्त में पुनःउनको प्रणाम कर इस ग्रन्थ का उपसंहार कर
रहा हूँ ।
तस्यादितः कौतुक पञ्जिकाख्यं वक्षामि किञ्चिद् गणितं मयायद् ।
कैशोर भाजां रचि पञ्जिकालिं दृष्ट्वैव पित्रा लिखितां प्रयत्नात् । २ ।
ग्रन्थ समाप्त करने से पहले कौतुक पञ्जिका नाम से कितनी गणित विधियां
मैं कहूंगा । मेरे पिता ने बहुत परिश्रम कर बहुत सी पाञ्जी बनायी थी । मैने
युवावस्था में इन्हें देखकर यह कौतुक पञ्जिका तैयार की थी ।
कौतुक पञ्जिका
पञ्चांगपाञ्जीं प्रविलोक्य चैकामन्वां ततः कल्पयितुंक्षमः स्यात्
जनो धनुर्ज्या पदकाद्यविज्ञो यथा तथायं क्रियते प्रकारः । ३ ।
चाप गणित (ज्या, कोटिज्या आदि) बिना जाने केवल पुरानी पाञ्जी (पञ्चाग)
देखकर जिस विधि से नयी पांजी बनायी जा सकती है, वह विधि कर रहा हूँ ।
कुवासरा नागशराग्नि (३५८) तुल्या नागेन्दु नाड्योरस भू (१६) विनाड्य
कृतांगरामै (३६४) स्तिथिभिः समाप्ताः स्युर्मन्द्र केन्द्रौजपदान्तगेऽर्के । ४ ।
अपने मन्दोच्च से सूर्य पूर्व या पीछे के पदान्त में रहने पर उस वर्ष के सावनदिनों
की संख्या ३५८।१८।१६ होगी । इतने दिनों में ३६४ तिथि या चन्द्र दिन समाप्त
होंगे ।
पलैस्त्रिभि (३) विश्व (१३) मितैश्च दण्डे
र्युक्तानिपूर्वोक्त महीदिनानि । ३५८।१३ । ३ ।
ऋक्षैश्चतुः पञ्चगुणैः (३५४) समाप्तं
यान्त्यत्र नेष्टं रवि मन्द केन्द्रम् । ५ ।
३५८।१३।३ सावन दिनों में ३५४ नाक्षत्र दिन होते हैं । अतः चन्द्र मन्द केन्द्र
की आवश्यकता नहीं है ।
कुवासरास्ते (३५८) सदलेन्द्र (१४।३०) नाड़ी
युक्ता खनागज्ज्वलनैः सहाद्देैः (३८०)