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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 525

४२८ सिद्धान्त दर्पण
• योगैः समाप्तिं खलु यान्ति मन्द
केन्द्रौज पादान्त गते खरांशौ । ६ ।
३५८।१४।३० सावन दिन में ३८० १/२ योग होता है । यह सब मन्द केन्द्र से
विषम पादान्त में रवि रहन से होता है ।
तिथ्यर्द्धके यत्र यदिष्ट मेतत् संवत्सरान्ते करणं प्रमेयम्
नक्षत्र भोगांघ्रि विवेचनेन नवर्क्षपादान्त कराशयः स्युः । ७ ।
जिस तिथ्यर्द्ध में जो करण है, एक वर्ष बाद उसी तिथि के उसी अर्द्ध में
वही करण फिर होगा । नक्षत्र के चार पाद करने पर प्रत्येक राशि में ९ नक्षत्र पाद
होंगे ।
पूर्णेष्षतो द्वादशसु क्षपेष मासेषु यद्यन्ति विभाद्यमिष्टम्
तत्पूर्वं वर्षे हि तिथिः कृतो (४) ना ग्राह्या
गुणो (३) नं भमथापि योगः । ८ ।
१२ चान्द्र मास पूर्ण होने पर अर्थात् ३५८ सावन दिनों में ( एक सौराब्द के
अन्तः पात ३५८ सावन दिनों में) चान्द्र वर्ष की ४ तिथि अधिक होगी । पूर्ण
भगण का ३ नक्षत्र तथा पूर्ण योग में
सार्द्धद्वयो (२ १/२) नः परिगृह्यतां तद् ग्राह्यर्क्षतिथ्यन्त त एव देयाः
पुरोदितास्ता निजनाड़िकाद्या योगस्य मध्यादथ तत्तत्‌राढ्याः । ९ ।
. (तिथि नाड्यः (१८।१६ भनाड्यः १३।३ योगनाड्यः १४।३०)
२ १/२ योग अधिक होता है । पूर्व वर्ष में जो तिथि आदि ग्रहण करने से
वर्तमान वर्ष की इष्ट तिथि होती है । उसी को ही ग्राह्य तिथि आदि कहते हैं।
ग्राह्य नक्षत्र में १८।१६ नाड़ी, ग्राह्य तिथि में १३।३ दण्ड तथा ग्राह्य योग में १४।३०
दण्ड जोड़ेगे ।
तिथ्यादयः षष्टि घटीभ्य ऊना भवन्ति चेदिष्ट तमास्तदैकः
ग्राह्ये दिने वार इहैव देयो द्वौषष्टिदण्डाधिकता पिचेत्तौ । १० ।
यह सब योग करने पर फल यदि ६० दण्ड से कम हो तो ग्राह्य दिन में एक
एक वार जोड़ना होगा । फल ६० दण्ड से अधिक होने पर २ वार जोड़ा जायेगा ।
तद् ग्राह्यतिथ्यां तिथयश्चतस्रो योज्याश्चतस्रः किलतारकायाम्
योगे च सार्द्धद्वयमेवमिष्ट तिथ्यादयो ग्राह्यत उद् भवन्ति । ११ ।
फल की ग्राह्यतिथि में ४ तिथि, नक्षत्र में ४ तारा तथा योग में २-१/२ योग
जोड़ा जायेगा । इसके प्रकार ग्राह्य तिथि आदि से इष्ट तिथि आदि हो जायेगा ।
मासेऽत्रपक्षे ऽत्र तिथिर्मदिष्टा की दृश्य मुख्यां कथमृक्षयोगौ
इतिस्थिते प्रश्न विधौ तिथिः सा पञ्चांग मुख्या प्रतिभाति यस्मात् । १२.।