सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोलाधिकारे गोलादि वर्णनम् ३५१
एक कक्ष और बहुकक्ष - दो प्रकार के गोल यन्त्रों का वर्णन हुआ । अपनी
(या किसी अन्य वस्तु) की छाया भ्रम (छाया की दिशा और लम्बाई) या यन्त्र
घूमने से भी काल का ज्ञान आसानी से हो सकता है । तथापि अल्पज्ञ लोगों को
समय ज्ञान के लिए कालयन्त्र के बारे में कहता हूं ।
चक्रेण यष्ट्या धनुषा नरेण तूर्येण घट् या फलकादिना च
काचैः परोभिः सिकतादिभिश्च सूत्रैः स्वकालं कलयन्तितज्ज्ञाः ७७ ।
चक्र यन्त्र से (नाड़ी मण्डल का या दृङ् मण्डल में) यष्टि यन्त्र में, वृत्तार्द्ध
चाप यन्त्र से, शंकु से, वृत्त चतुर्थांश से, घड़ी यन्त्र से, भास्कर द्वारा वर्णित
फलकादियन्त्र से, काठी से, पानी से, बालू से, या सूत्र यन्त्र से भी समय का
ज्ञान हो सकता है । यन्त्र जानने वाले व्यक्ति प्रत्येक यन्त्र से काल ज्ञान कर सकते
हैं ।
गोलार्द्ध यन्त्रं समया वगत्त्यै कृत्वामृदाकुम्भ दलस्वरूपम्
दृक् सिद्ध मत्यामवनौ निघाय तदूर्ध्व वक्रं खलु भार्द्धबुद्धया । ७८ ।
मिट्टी के घड़ने के निचले आधे भाग के समान एक गोलार्द्ध यन्त्र बनायें ।
उसको जमीन पर ऊपरकी तरफ मुंह कर रख उसमें उस स्थान का पूर्व पश्चिम
आदि दिशा का साधन कर चिह्न देंगे । पृथ्वी के ऊपर उसका जो वक्र भाग है ।
उसको वृत्तार्द्ध मानें ।
उदग् ध्रुवं दक्षिण भित्तिमस्तकादधोऽक्ष भागे रुदरे निवेश्यच ।
ततो ध्रुवाक्रान्तर भाग तुल्य शलाकयोन्मुखया ध्रुवस्थया । ७९ ।
उसके उदर (भीतरी भाग) में पूर्वापर और याम्योत्तर वृत्त खींचेंगे । दक्षिण
उत्तर मस्तक से नीचे अक्षांश अन्तर से उत्तर ध्रुव देकर कलश के पेट में चिह्न
देंगे । तब ध्रुव और सूर्य की अन्तर रेखा व्यासार्द्ध से ध्रुव को केन्द्र मान एक वृत्त
खींचेंगे ।
विलिख्यतत् पश्चिमभित्तिमूर्ध्वतः पुरः स्थभित्यन्त विसर्पिरेखिकाम् ।
निघाय तद् व्यास दल प्रमाणकं नरञ्च साध्ये सरलं दिनादितः । ८० ।
यह वृत्त उस समय के लिए अहोरात्र वृत्त होगा । इस अहोरात्र वृत्त के
व्यासार्द्ध के बराबर ऊंचाई का एक सरल शंकु गोलार्द्ध के बीच में रखेंगे । जो
अहोरात्र वृत्त होगा । उसको भी
स्वघस्र नाड़ी पल लक्ष लक्षिते पुरोक्त रेखावलयार्द्ध केऽन्वितात्
नरप्रभाप्राप्तसमयं प्रतीयतां सितांश्रुतो निश्यपि सूक्ष्म बुद्धिना । ८१ ।
नाड़ी पल आदि से चिह्नित करेंगे । उस पर शंकु छाया की स्थिति से समय
का ज्ञान हो जायेगा । बुद्धिमान् लोग इसी यन्त्र द्वारा रात में भी चैन्द्र से समय
का ज्ञान कर सकते हैं ।