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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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गोलाधिकारे गोलादि वर्णनम् ३४३
बाद में होता है । समय का यह अन्तर चर कहा जाता है) अहोरात्र वृत्त और
याम्योत्तर वृत्त के सम्पात को खार्द्ध कहते हैं । खार्द्ध से क्षितिज धरातल के उदयास्त
सूत्र पर लम्ब को हृति कहते हैं । त्रिज्या वृत्त में हृति को अन्त्यज्या कहते हैं ।
आधार विषुव कक्षा व्यपदत्त क्षिति जनाभ वृत्तानाम्
साम्येऽपि किञ्चिद धिकं क्षितिजं कार्यं चलत्वाय । २७ ।
दोनों आधार वृत्त, विषुव और क्रान्ति वृत्त और क्षितिज वृत्त इन सभी की
परिधि का परिणाम समान होने भी पर क्षितिज वृत्त थोड़ा बड़ा रखा जाता है ।
नहीं तो उसे घुमाया नहीं जा सकता ।
भू सहित ध्रुवयष्टेर्निश्चल भावो भगोल चलता च
भवति यथैवं नाभ्योस्तैलं योज्यं सुख प्रान्त्यै । २८ ।
पृथ्वी के साथ ध्रुव यष्टि को निश्चल रखा जायेगा । भगोल इस प्रकार किया
जायेगा, कि उसे घुमाया जा सकें । वृत्तों के जोड़ो पर थोड़ा तेल देने से उन्हें
सरलता से