सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 441, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ें३४४ सिद्धान्त दर्पण
कोणाख्य वृत्त युगलं दिङ् मण्डलं नामकं षडेतानि
निश्चल खगोल मध्ये भगोल चलनं भवेदत्र । ३३ ।
दो कोणवृत्त तथा दिङ् मण्डल वृत्त । खगोल में ये ६ वृत्त दृढ़ और अचल
होंगे पर उसके भीतर भगोल घुमाने लायक स्थिर किया जायेगा ।
अथनिज देशे भादिन उदयास्त मयादि वीक्षितुं साक्षात्
स्तम्भ युगोर्द्धाधरयोर्ध्रुव यष्टी रन्ध्रयोः स्थाप्याः । ३४ ।
अब अपने स्थान पर दिन में छाया तथा ग्रहों का उदय और अस्त प्रत्यक्ष
देखने के लिए दो स्थम्भों के ऊपर और नीचे के छेद में ध्रुव और यष्टि को
लगायेंगे ।
गोलद्वये स्वदेशानुसारि सममण्डलं तथा क्षितिजम्
बद्ध्वा खगोल कान्तर्याम्योत्तर मण्डलस्य पुनः । ३५ ।
खगोल और भगोल दोनों में अपने स्थान का पूर्व पश्चिम क्षितिज वृत्त बान्ध
कर खगोल वृत्त के याम्योत्तर
सममण्डलस्य योग स्थान युगे कीलक द्वयं न्यस्य
दृग् गोलाख्यं