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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 377

२८० सिद्धांत दर्पण
पर भ्रमण (या उसकी सतह के बिन्दु का भगण) काल २५ दिन हैं ।
तदन्तरं भास्कर मध्य केन्द्रस्तदीय बिम्बार्द्धमितं भवेद् यतः ।
ततोऽत्र केन्द्रं सवितेति कल्पितं स्वगोल पृष्ठं ग्रहकक्षित्येपि । १२३ ।
अतः ऐसे ग्रह की मध्यविन्दु की सूर्य से दूरी सूर्य के बिम्बार्द्ध (व्यासार्द्ध)
के बराबर होगी क्योंकि वह सूर्य पृष्ठ से सटा हुआ है ।
तदन्तरालस्य (२,२२,१६१।३०) घनाङ्क
(१०९६४९४३४७२९९०७८३ ।२२।३०।
भाजतात् बुधादि मार्गस्य घनाङ्कतः फलम्
यदेव तेन ज्ञसितादि कालज् कृति र्हता तत्फलतः पदंहि यत् । १२४ ।
इस दूरी (सूर्य का व्यासार्द्ध = २,२२,१६१।३०) कोस का घन
(१०,९६,४९,४३,४७,२९९०,७८३।२२।३०। का बुध कोस के घन से भाग देकर
बुध के भगण काल ८८ दिन से गुणा करने पर मात्र ६ । ५२ दण्ड आता है ।
भवेदखेः स्वभ्रमकालएव तत् सपक्ष नाराच फलाङ्क नाड़िकम् (६।२२)
तदेक घस्रे नव वार वेष्टनं विपाद यं दृष्ट विरुद्धमापतेत् । १२५ ।
यह मान (६।५२) दण्ड ही सूर्य का अपने अक्ष पर भ्रमण काल होना चाहिये ।
इसका अर्थ कि सूर्य एक दिन में अपने अक्ष पर ९ चक्र से एक पाद कम पूरा
करना चाहिये जो कि यन्त्र दृष्ट मान (२५ दिन में एक भगण) के विरुद्ध है ।
अथेषुपक्षा (२५) भ्रमणस्यवासराः समक्ष भावाद् यदि ते मताः स्थिराः
तदान्यखेट भ्रमिकाल वर्गंतो रवि भ्रमो वासर वर्ग भाजितात् । १२६ ।
पुनः यदि सूर्य का अपने अक्ष पर भ्रमण काल २५ दिन माना जाय तो मंगल
आदि ग्रह के भगण काल (६८७ दिन) वर्ग को रवि भगण काल (अपने अक्ष पर)
(२५ दिन) के वर्ग से भाग देकर
फलेन खेटान्तर दूरता घने हृते फलात् यद् घन मूल मागतम्
तदर्क बिम्बार्द्धयतोऽर्क विस्तृति, तत् स्पष्ट मानात् रस वहि गुणितः ।१२७।
फल से मंगल की दूरी के घन में भाग देने हैं तथा फल का घन मूल निकालते
हैं । इससे सूर्य के बिम्बार्द्ध का जो मान आता है । वह वास्तविक मान का ३६
गुणा है ।
स्वमान सिद्धौ भ्रमं विरुद्धयते भ्रमस्य सिद्धौ च विरुद्ध यते मितिः ।
स्वकारणः स्योभय मेत्यसिद्धतः किमन्यकार्यं प्रमाणानुपातः । १२८ ।
इस प्रकार यदि सूर्य बिम्ब का मान ठीक मानते हैं । भगण दूरी सम्बन्ध के
कारण उसका भगण काल गलत आता है और भगण काल ठीक मानने पर बिम्ब
मान गलता आता है । इस प्रकार सूर्य का अपना ही भ्रमण काल और बिम्बमान