सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 376, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूगोलस्थिति वर्णनम् २७९
सूर्य से ग्रह की दूरी का घन तथा ग्रह के भगण काल के वर्ग का अनुपात
अन्योऽन्यं सर्वखेटस्यतुल्यं सोऽयं यद्
वद् भूः शरांकाग्नि (३६५) घस्त्रैः
सप्ताष्टाङ्गैः (६८७) मंगलोऽभि भ्रमेत् तद्
वर्गाद्वन्द्वस्याभवद्योऽनुपातः (३।३१) । ११८ ।
सभी ग्रहों के लिये समान होता है । पृथ्वी के भगणकाल (३६५ दिन) तथा
मंगल के भगण काल (६८७ दिन ) के वर्ग का अनुपात ।
(मंगल भगण)² ६८७²
───────────── = ───── = ३/३१ = ३.५१९
(पृथ्वी भगण)² ३६५²
सोऽयं लक्षक्षुण्ण पञ्चाद्रि वेद (४,७५,००,०००)
क्रोश क्षौणी पद्धते र्मध्यमायाः
खाप्र व्योमाकाश तत्वाक्षिशैल (७,२२,५०,०००)
क्रोश क्षौणीपुत्र मार्गस्यचापि । ११९ ।
सूर्य से पृथ्वी की दूरी (४,७५,००,०००) कोस तथा मंगल की दूरी
(७,२२,५०,०००) कोस है ।
सम्बन्धः (३।३१) स्याकेन्द्र सूर्यदे घनाङ्क द्वन्द्व स्वेत्थं तथ्यवद्य त्वामात्थ
व्यर्थो कर्तुं कम्पते तन्मनीषा दोषा भासादुच्यतेकोऽ पि भाषा । १२० ।
(मंगल दूरी)³ (७,२२,५०,०००)³
─────────── = ──────────────── = ३.५१९ = ३/३१
(पृथ्वी दूरी)³ (४,७५,००,०००)³
भगण के वर्गों इस प्रकार भगण काल के वर्ग का अनुपात तथा दूरी के घन
का अनुपात पृथ्वी और मंगल के लिये समान है । इस नियम की सत्यता के
आधार पर यदि आप पृथ्वी का भ्रमण होना प्रमाणित करते हैं तो मेरी बुद्धि
विचलित हो जाती है । और बहुत सी बातें कहनी पडेंगी ।
न कार्य मुन्मीलति कारणादृते रवि भ्रमादेव खगाभ्रमन्तिते
अतोऽनुपातः किल काल मार्ग योग्रहैः समं कर्तुमिनस्ययुज्यते । १२१ ।
बिना कारण के कार्य नहीं होता । यदि सूर्य के अपने अक्ष पर भ्रमण के
कारण उसके चारों तरफ पृथ्वी आदि ग्रह घूमते हैं । तभी ग्रहों की दूरी तथा काल
का आनुपातिक सम्बन्ध करना उचित है ।
यदोबिम्बाति समीपगो ग्रहः प्रकल्प्यते कश्चिदसौ ध्रुवो ऽ भवत् ।
सयन्त्र दृक् सिद्ध ख रांशु मण्डल भ्रमक्रमात्तत्व (२५)
दिनै भ्रमेद् ध्रुवम् । १२२ ।
यदि यह अनुपातिक सम्बन्ध ठीक है तो सूर्य के अति निकट (पृथ्वी के
निकट मेष के समान) यदि कोई ग्रह हो तो उसका सूर्य के चारों ओर का भगण
काल २५ दिनों होना चाहिये । क्योंकि यन्त्र द्वारा दृक् सिद्ध सूर्य का अपने अक्ष