सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूगोलस्थिति वर्णनम् २८१
ये दोनों अनुपात के विरुद्ध हैं फिर उसके कारण मंगल आदि ग्रहों का भ्रम उस
नियम से कैसे होगा ?
मध्यरविं पर्ययतां ग्रहाणां क्षमतः क्रमादन्तिक दूर वृत्तो
चक्रार्द्ध चक्रे चल केन्द्र भक्ते ते मन्द केन्द्रे रवितस्तथैव । १२९ ।
अपनी अपनी कक्षा में मध्यम सूर्य का परि भ्रमण करते हुए मंगल आदि ग्रहों
का निकट में चक्रार्द्ध में तथा दूर रहने पर चक्र पूर्ण होने पर शीघ्र केन्द्र होता है।
भूगर्भ. से जो रेखा तुलादि तथा मेष आदि में प्रति वृत्त को काटती है। वही दो
स्थान तुला आदि तथा मेष आदि का शीघ्र केन्द्र होता है।
स्वीयैरेक विधग्रहैः सदापरिधिभि भौमादिकानां फलं
शैघ्रं मन्दभवं सुसिद्ध मवनौ दृक् तुल्यतां यादि चेत्
तन्नो भानुमतां सह ग्रहगणाः पर्येतु सर्वं सहां
भू सूर्य द्वय दिग् विशेष वसते द्राक् केन्द्र त निश्चयात् । १३० ।
ठीक उसी प्रकार मध्यम सूर्य से मन्द प्रति वृत्त के सबसे निकट तथा सबसे
दूर स्थित तुलादि तथा मेषादि में मन्द केन्द्र होता है। मंगल आदि ग्रहों का शीघ्र
और मन्दफल एक प्रकार का होता है। पृथ्वी सूर्य से उल्टी दिशा में (पृथ्वी से
सूर्य की दिशा का उल्टा) होने से और उसी से शीघ्र केन्द्र स्थिर होने के कारण
यही मानना सुविधा जनक है कि सूर्य ग्रहों के साथ पृथ्वी की प्रदक्षिणा करे।
ओजार्ध्यन्त जुषः कुजस्य परिधि स्त्र्यंशाधिको दृश्यते
सूर्याद् भूदिशि तत्परोच्चत इदं मन्दः समाकृष्यते ।
तेनाकर्षित बिम्बतो मृदुफलं कौजं स्फुटं दृक् समं
शीघ्रोत्थेन फलेन किञ्चिदधिकं यन्मन्द केन्द्राच्च तत् । १३१ ।
विषम पादान्त में मंगल की मन्द परिधि तीन अंश अधिक होती है। यह
मन्द परिधि (मन्दोच्च) सूर्य से पृथ्वी की दिशा में स्थित परोच्च द्वारा आकृष्ट होता
है। अतः परोच्च तथा उससे आकृष्ट मन्दोच्च से आकृष्ट मंगल बिम्ब का जो दृक्
सिद्ध मन्दफल होता है, वह शीघ्रफल से थोड़ा अधिक होता है। मंगल के मन्द
केन्द्र के कारण ऐसा होता है।
ग्लौजन्मन श्लफलोपच यात् फलस्य
मान्द्यस्य चापतय निश्चयतः चलस्य
मन्दोत्थ केन्द्र वशतो बहुताल्पतायत्
तत्सर्वमर्क कु युगान्न तु केवलार्कात् । १३२ ।
बुध का शीघ्र फल में वृद्धि तथा मन्दफल का ह्रास और मन्द केन्द्र के कारण
शीघ्र फल बढ़ना और घटना आदि केवल सूर्य के कारण नहीं होता। (सूर्य और
बुध का मन्द केन्द्र दोनों कारण हैं।)