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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 298, कुल 609 में से

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पृष्ठ 298

भ ग्रह योग वर्णनम् १९९
महदन्तर मे वस्यात्तदुदग् याम्य भागयोः
प्राक् पश्चिमान्तरस्यायं क्रमोना वागुदं मिते । ६६ ।
विषुव से उत्तर का दक्षिण जाने पर कालांश और मानांश में बहुत अन्तर
होगा । सप्तर्षि मण्डल के तारों का क्रम पूर्व पश्चिम दिशा स्थिति (देशान्तर के
अनुसार) लिया जाता है (सबसे पश्चिम का पहला तारा आदि) यह उत्तर दक्षिण
दिशा (अक्षांश) के क्रम से नहीं लिया जाता ।
यथात्र पुलह क्रत्वो सौम्य याम्यन्तरं शराः (५)
भागा एव समादृष्टा मरीच्यन्तं क्रतो पुनः । ६७ ।
जिस प्रकार पुलह और क्रतु का शरान्तर (ध्रुव प्रोतीय वृत्तान्तर) ५° मात्र है,
यह सदा समान रहता है । उसी प्रकार क्रतु और मारीचि का पूर्व-पश्चिम अन्तर
प्राक् पश्चादन्तरेदृष्टा दृष्टा मानांश स्तत्त्व (२५) संख्यकाः ।
सार्द्धा (०।३०) तत्त्व शरां शेभ्य स्तयोः साध्यौ स्फुटा पमौ । ६८ ।
मानांश २५° तथा शरांश २५° ३०' है । इससे पूर्व विधि से स्फुट क्रान्ति का
साधन किया जा सकता है ।
दिनव्यास दले प्राग्वत् तद् योगार्द्ध हति र्भवेत् ।
मानां शास्त्रि ज्याभ्यस्ता हृत्प्राप्ताः क्षेत्रजांशकाः । ६९ ।
स्फुट क्रान्ति द्वारा द्युज्या का साधन होगा । दोनों द्युज्या (क्रान्ति वृत्तीय और
विषुव वृत्तीय) का योगार्द्ध हार कहलाता है । मानांश को त्रिज्या से गुणा कर
हार से भाग देने से प्राप्त फल क्षेत्रांश (क्रान्ति वृत्तीय अंश)
स्युस्ते लग्नाः सुगुणिताः ख ख नाग मही (१८००) हताः ।
कालांशाः स्युस्ततो मान भाग व्युत्क्रम कर्मतः । ७० ।
क्षेत्रांश को राशि से उदयासु से गुणा कर (१८००) से भाग देने पर फल का
कालांश होता है । इस प्रकार मरीचि और क्रतु का कालांश आयेगा विपरीत
क्रिया से इस कालांश से मानांश निकलेगा ।
एवं ध्रुव भ्रान्ति मार्ग खांगाग्नि (३६०) क्षेत्र भाग कः ।
अप्यष्टाम्बुधि लिप्तास्तु वसु (८।४८) मानांश सम्मिताः । ७१ ।
ध्रुव क्षेत्र के भ्रमण मार्ग का वृत्त ३६०° अंश होने से उसका मानांश
(३६०X८४)/३४३८ = ८'४८" मात्र है ।
क्रान्ति भेदे महर्षि णा माकृतेः समता यदि
स्यात्तदान्तर कालांशाः क्रान्त्यल्पत्व महत्वयोः । ७२ ।
क्रान्ति बदलने पर सप्तर्षियों का आकार यदि स्थिर रहता है (क्रान्ति कै साथ
नहीं बदलता) तो क्रान्ति कम या अधिक होने पर