सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्रमादल्पाश्च भूयासो भवेयु र्द्युगुण क्रमात्
कालांशशर मेतेषां क्रान्ति भेदे यदि स्थिरम् । ७३ ।
उदयान्तर भी कम या अधिक होता है (क्रमानुसार द्युज्या अधिक या कम
होने के कारण) ।
यदि क्रान्ति भेद होने पर सप्तर्षि तारों का कालान्तर स्थिर रहता है,
तद् कृतेर्हानि वृद्धि स्या तामृक्षान्तरांश वत् ।
स्थिरा क्रान्ति र्यदैषां स्यात् कालांश, स्युस्तदास्थिराः । ७४ ।
तो क्रान्ति कम या अधिक होने पर तारा का पूर्व पश्चिम अन्तर कम या अधिक
अक्षांश अन्तर के समान होता है । यदि ताराओं की कान्ति स्थिर हो तो उनका
कालांश भी स्थिर रहेगा ।
क्षेत्रांशानां स्थिरत्वे स्यात् काल मानाल्प भूरिता
क्षेत्र मानांशयोः सिद्धिः काल भागां शयोरिव । ७५ ।
क्षेत्रांश स्थिर रहने पर कालांश के साथ मानांश कम या अधिक होगा ।
कालांश और भागांश के समान ही कालांश और मानांश का परस्पर सम्बन्ध
निकलेगा ।
नक्षत्राणां ध्रु