श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. ३६: संकट कटै मिटै सब पीरा
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥
शब्दार्थ—बलबीरा ▸ बलसे युक्त वीर।
अर्थ—जो अतुलनीय-बलयुक्त वीर श्रीहनुमान्जी महाराजका स्मरण
करता है, उसके समस्त संकट कट जाते हैं तथा सभी पीड़ाएँ मिट जाती
हैं।
व्याख्या—हनुमान्जीके स्मरणसे श्रीशिव-पार्वती एवं श्रीसीता-राम-
लक्ष्मण प्रसन्न होकर साधकके पञ्चक्लेश (अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष,
और अभिनिवेश) को हर लेते हैं। यथा—
सानुग सगौरि सानुकूल सूलपानि ताहि
लोकपाल सकल लखन राम जानकी।
लोक परलोक को बिसोक सो तिलोक ताहि
तुलसी तमाहि ताहि काहू बीर आन की।
केसरी-किसोर बंदीछोर के नेवाजे सब
कीरति बिमल कपि करुनानिधान की।
बालक ज्यों पालिहैं कृपालु मुनि सिद्ध ताको
जाके हिये हुलसति हाँक हनुमान की॥
—ह.बा. १३
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