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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 90

चौ. ३७: जय जय जय हनुमान गोसाईं महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥
शब्दार्थ—गोसाईं ▸ इन्द्रियोंके स्वामी।
अर्थ—हे गोसाईं हनुमान्जी महाराज! आपकी जय हो! जय हो!! जय
हो!!! आप गुरुदेवकी भाँति वात्सल्यपूर्ण कृपा करें।
व्याख्या—हनुमान्जी सच्चिदानन्द हैं, इसलिए गोस्वामीजी तीन बार
जय शब्दका प्रयोग करते हैं। प्रथम जयसे हनुमान्-चालीसा ग्रन्थका
उपक्रम किया था। पुनः जयसे उपसंहार करके उनसे कृपाकी याचना
कर रहे हैं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं अर्थात् कठोर कृपा न करें। जीवपर दो
ही कृपा कर सकते हैं—गुरु एवं गोविन्द। गोविन्दकी कृपामें कठोरताके
साथ कोमलता होती है, जैसे असुरोंके निग्रह में। किन्तु गुरुकृपा निरन्तर
कोमलतासे ओत-प्रोत रहती है। यथा—
एक शूल मोहि बिसर न काऊ।
गुरु कर कोमल शील सुभाऊ॥
—रा.च.मा. ७-११०-२
अतः प्रभो! गुरुदेवकी भाँति कृपा करके आप मुझे श्रीरामप्रेमका ज्ञान
कराएँ।
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