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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 83

महावीरी व्याख्या चौ. ३१: अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता॥ ३१ ॥
शब्दार्थ—दाता ▸ देने वाले।
अर्थ—आप अष्ट सिद्धियों एवं नव निधियोंके देने वाले हैं। जनकनन्दिनी
श्रीसीता माताने आपको ऐसा वरदान दिया है।
व्याख्या—अशोकवाटिकामें जब श्रीआञ्जनेयके वाक्चातुर्यसे माँ मैथिली
भली-भाँति संतुष्ट हो गईं, तब इन्होंने आञ्जनेयको आशीर्वाद-पुष्पोंसे विभूषित
कर दिया। यहाँ मायाकी सीता अविद्या अथवा विद्या रूपमें नहीं हैं, अपितु
श्रीराघवकी लीलाशक्ति ही माया सीताके रूपमें वर्तमान हैं, अन्यथा मायाके
मिथ्यात्वसे आञ्जनेयको दिए हुए आशीर्वाद भी प्रामाणिक न हो पाएँगे। इस
प्रसंगका संकेत भावी किसी ग्रन्थमें किया जाएगा। अथ प्रकृतमनुसरामः।
यथा—
आशिष दीन्ह राम प्रिय जाना।
होहु तात बल शील निधाना॥
अजर अमर गुननिधि सुत होहू।
करहु बहुत रघुनायक छोहू॥
करिहिं कृपा प्रभु अस सुनि काना।
निर्भर प्रेम मगन हनुमाना॥
—रा.च.मा. ५-१७-२,३,४
सिद्धियाँ आठ हैं—
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