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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. ३०: साधु संत के तुम रखवारे महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर-निकंदन राम-दुलारे ॥ ३० ॥
शब्दार्थ—असुर-निकंदन ▸ राक्षसोंको मारने वाले।
अर्थ—हे राक्षसोंको नष्ट करने वाले श्रीरामजीके दुलारे श्रीहनुमान्‌जी
महाराज! आप साधु तथा सन्तोंके रक्षक हैं।
व्याख्या—यहाँ साधु शब्द साधनारत भक्तोंकी ओर संकेत करता है
एवं संत शब्द साधनसंपन्न भक्तको सूचित करता है। दोनोंको हनुमान्‌जीकी
अपेक्षा है। साधु सुग्रीव तथा सन्त विभीषण दोनों हनुमान्‌जीसे रक्षित हैं।
यथा—दुर्जन को काल सो कराल पाल सज्जन को (ह.बा. १०)।
राम-दुलारे—हनुमान्‌जी राघवजीके दुलारे हैं। यथा—राम को दुलारो
दास (ह.बा. ९)।
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