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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. २९: चारिउ जुग परताप तुम्हारा महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
चारिउ जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत-उजियारा॥ २९ ॥
शब्दार्थ—उजियारा ▸ उजाला।
अर्थ—हे प्रभो! आपका प्रताप कृतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, एवं
कलियुग—इन चारों युगोंमें प्रसिद्ध है। इससे जगत्में उजाला छाया हुआ
है।
व्याख्या—श्रीराम सार्वकालिक हैं। अतः प्राकट्यके पहले स्वायम्भुव
मन्वन्तरके कृतयुगमें मनु-शतरूपाको द्विभुज रूपमें ही दर्शन दिया। यथा—
भृकुटि बिलास जासु जग होई।
राम बाम दिशि सीता सोई॥
—रा.च.मा. १-१४८-४
उसी प्रकार इनका नाम भी चारों युगोंमें प्रसिद्ध है, यथा—चहुँ जुग चहुँ
श्रुति नाम प्रभाऊ (रा.च.मा.१-२२-८)। अतः कृतयुगमें प्रह्लाद भी रामनाम
जपते थे। यथा—राम कहाँ सब ठौर हैं खम्भ में हाँ सुनि हाँक नृकेहरि
जागे (क. ७-१२८)। प्रह्लाद दैत्य-बालकोंसे स्वयं कहते हैं—
रामनामजपतां कुतो भयं सर्वतापशमनैकभेषजम्।
पश्य तात मम गात्रसन्निधौ पावकोऽपि सलिलायतेऽधुना॥
तद्वत् श्रीरामजीके परिकर श्रीहनुमान्जी भी चारों युगोंमें रहते हैं। वैवस्वत
मन्वन्तरके २४वें त्रेतायुगके अन्तमें प्रभुका प्राकट्य हुआ। पश्चात् प्रभुने
आञ्जनेयको तब तकके लिए अमरत्व प्रदान किया, जब तक श्रीराम-
कथाका प्रवाह धराधामपर अक्षुण्ण रहे। अतः उस समयसे अद्यावधि
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