श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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चौ. २५: नासै रोग हरै सब पीरा महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥
शब्दार्थ—निरंतर ▸ नित्य, सदा।
अर्थ—सदैव भक्तोंके द्वारा जपके विषय-भूत होनेपर वीर हनुमान्जी
रोगोंको नष्ट कर देते हैं एवं समस्त पीड़ाओंको हर लेते हैं।
व्याख्या—रोग यहाँ शारीरिक रोगोंका वाचक है। पीरा शब्दका
कामादि आध्यात्मिक पीड़ाओंसे तात्पर्य है। भाव यह है कि गुरुदीक्षालब्ध
श्रीहनुमन्मन्त्रका जप करनेसे साधकके शरीरके रोग तथा आध्यात्मिक ताप
नष्ट हो जाते हैं।
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