श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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महावीरी व्याख्या चौ. २४: भूत पिशाच निकट नहिं आवै
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥
शब्दार्थ— भूत पिशाच ▸ अकाल मृत्युको प्राप्त उग्र आत्मा अथवा
निम्न देवयोनि।
अर्थ—जब भावुक भक्त महावीर नाम सुना-सुना कर कीर्तन करते हैं,
उस समय भूत पिशाच उनके निकट नहीं आते।
व्याख्या—अब महावीर नाम विशेषकी महत्ता कहते हैं। यह भूत-
पिशाचोंका त्रासक है। यथा—पूतना पिशाची जातुधानी जातुधान वाम
रामदूत की रजाइ माथे मान लेत हैं (ह.बा. ३२)।
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