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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. २२: सब सुख लहहिं तुम्हारी शरना महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
सब सुख लहहिं तुम्हारी शरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥ २२ ॥
शब्दार्थ—शरना ▸ शरण में। लहहिं ▸ प्राप्त करते हैं।
अर्थ—हे हनुमान्जी महाराज! आपकी शरणमें आकर साधक जन
समस्त सुख प्राप्त कर लेते हैं। आप रक्षक हैं, अतः अब किसीका डर नहीं
है।
व्याख्या—जय-विजयकी भाँति आप किसी आगन्तुकको भगवान्‌के
दर्शनसे वञ्चित नहीं करते, अपितु उनसे पूछे बिना भी अपनी कृपालुतासे
आप श्रीराघवका दर्शन करा देते हैं। अब हम निर्भीक हो गए हैं। यथा—
साहसी समत्थ तुलसी को नाह जाकी बाँह
लोकपाल-पालन को फिर थिर थल भो।
—ह.बा. ६
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