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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 73

महावीरी व्याख्या चौ. २३: आपन तेज सम्हारो आपे
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
आपन तेज सम्हारो आपे।
तीनों लोक हाँक ते काँपे॥ २३ ॥
शब्दार्थ—सम्हारो ▸ स्मरण करें।
अर्थ—हे प्रभो! जब आप अपने तेजको स्मरण कर लेते हैं, तब आपकी
हाँकसे ही त्रैलोक्य कम्पित हो उठता है।
व्याख्या—सम्हारो शब्दका अर्थ है स्मरण। यथा—दीन दयाल बिरद
संभारी (रा.च.मा. ५-२७-४)। क्योंकि ऋषियोंके शापसे इन्हें अपना तेज
विस्मृत रहता है, इसलिए जाम्बवान्‌को स्मरण दिलाना पड़ा। यथा—
कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम पाहीं॥
—रा.च.मा. ४-३०-५
अतः आज भी भक्त लोग विरुदावली गाकर हनुमान्‌जीके तेजका उद्बोधन
करते हैं।
तीनों लोक हाँक ते काँपे—इनकी हाँकका वर्णन कवितावलीके
युद्धकाण्डमें इस प्रकार है—
मत्तभट-मुकुट-दशकंध-साहस-सइल-
सृंग-बिद्दरनि जनु बज्र टाँकी।
दसन धरि धरनि चिक्करत दिग्गज कमठ
शेष संकुचित संकित पिनाकी।
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