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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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महावीरी व्याख्या चौ. २१: राम-दुआरे तुम रखवारे
अर्थात् अन्य द्वारपाल अप्रत्याशित रूपमें स्वामीके यहाँ जानेवालोंको
बेंतके प्रहारसे निरस्त करते हैं, किन्तु श्रीहनुमान्‌जी महाराज रावणके द्वारा
कृत चरण-प्रहारसे पीड़ित विभीषणको भी भगवान्‌के श्रीचरणारविन्दका
शरणागत बना देते हैं। श्रीराघवकी शरणमें समागत विभीषणके प्रति जब
सुग्रीव नाना प्रकारके आक्षेप-प्रत्याक्षेप करने लगे, तब आञ्जनेयको बहुत
दुःख हुआ, पर श्रीराघवने मम पन शरनागत-भयहारी (रा.च.मा. ५-
४३-८) कहकर विभीषणको स्वीकारनेका निश्चय किया। तब हनुमान्‌जी
अत्यन्त प्रसन्न हुए, यथा—
सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना।
शरनागत-वत्सल भगवाना॥
—रा.च.मा. ५-४३-९
इस प्रकार अन्य द्वारपालकी अपेक्षा आगन्तुकको प्रभुके चरणोंमें जोड़नेकी
श्रीहनुमान्‌जीमें विलक्षण क्षमता है।
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