श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
पृष्ठ 71, कुल 110 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. २१: राम-दुआरे तुम रखवारे
अर्थात् अन्य द्वारपाल अप्रत्याशित रूपमें स्वामीके यहाँ जानेवालोंको
बेंतके प्रहारसे निरस्त करते हैं, किन्तु श्रीहनुमान्जी महाराज रावणके द्वारा
कृत चरण-प्रहारसे पीड़ित विभीषणको भी भगवान्के श्रीचरणारविन्दका
शरणागत बना देते हैं। श्रीराघवकी शरणमें समागत विभीषणके प्रति जब
सुग्रीव नाना प्रकारके आक्षेप-प्रत्याक्षेप करने लगे, तब आञ्जनेयको बहुत
दुःख हुआ, पर श्रीराघवने मम पन शरनागत-भयहारी (रा.च.मा. ५-
४३-८) कहकर विभीषणको स्वीकारनेका निश्चय किया। तब हनुमान्जी
अत्यन्त प्रसन्न हुए, यथा—
सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना।
शरनागत-वत्सल भगवाना॥
—रा.च.मा. ५-४३-९
इस प्रकार अन्य द्वारपालकी अपेक्षा आगन्तुकको प्रभुके चरणोंमें जोड़नेकी
श्रीहनुमान्जीमें विलक्षण क्षमता है।
५७