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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. २१: राम-दुआरे तुम रखवारे महावीरी व्याख्या
हृदय महत्त्वाकाङ्क्षाकी आगसे जल रहा है। अतः इस अपराधका उचित
दण्ड ही तुम्हारे लिए उपयुक्त है। तुम काम, क्रोध, लोभ इन तीनोंसे पीड़ित
हो। इसलिए तीन पापिष्ठ लोकोंमें जाओ।” अर्थात् प्रथम जन्ममें क्रोध-प्रधान
दैत्य बनो (हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष), द्वितीय जन्ममें काम-प्रधान राक्षस
बनो (रावण और कुम्भकर्ण), एवं तृतीय जन्ममें लोभ-प्रधान दानव-रूप
मानवताहीन मानव (शिशुपाल और दन्तवक्र) बनो। यहाँ तीन जन्म पर्यन्त
पापिष्ठ लोकोंमें जानेका शाप भी साभिप्राय था। सनकादि महर्षियोंने जय-
विजयको तीन जन्मके लिए इस कारण शाप दिया कि जय-विजयने उन्हें
तीन-तीन बेंत लगाये थे। यही त्रय इमे शब्दके प्रयोगका कारण प्रतीत होता
है, यथा—
तद्धाममुष्य परमस्य विकुण्ठभर्तुः
कर्तुं प्रकृष्टमिह धीमहि मन्दधीभ्याम्।
लोकानितो व्रजतमन्तरभावदृष्ट्या
पापीयसस्त्रय इमे रिपवोऽस्य यत्र॥
—भा.पु. ३-१५-३४
गोस्वामीजी भी इस प्रसंगकी चर्चा मानसजीमें बड़े ही रोचक ढंगसे करते
हैं—
द्वारपाल हरि के प्रिय दोऊ।
जय अरु विजय जान सब कोऊ॥
बिप्र-शाप तें दूनउ भाई।
तामस असुर-देह तिन पाई॥
—रा.च.मा. १-१२२-४,५
मुक्त न भये हते भगवाना।
तीनि जनम द्विज-बचन प्रमाना॥
— रा.च.मा. १-१२३-१
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