श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचौ. २१: राम-दुआरे तुम रखवारे महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
राम-दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥
शब्दार्थ—पैसारे ▸ प्रवेश।
अर्थ—हे अञ्जनीपुत्र! आप श्रीरामभद्रजूके राजद्वारके रक्षक, प्रतिहार,
द्वारपाल हैं। आपकी आज्ञाके बिना किसीका भी श्रीरामजीके परमधाममें
प्रवेश नहीं हो सकता।
व्याख्या—श्रीरामोपासनामें श्रीहनुमान्जीकी कृपा परम उपादेय है
क्योंकि ये ही राजाधिराजके जागरूक द्वारपाल हैं। इनकी प्रतिकूलतामें
जीवको श्रीराघवका आनुकूल्य नहीं प्राप्त हो सकता। अन्यत्र द्वारपाल
स्वामीकी आज्ञासे आगन्तुकको भवनमें प्रविष्ट करता है, पर यहाँ तो स्वामी
एवं सेवककी इतनी एकता है कि आञ्जनेयकी आज्ञा ही सर्वोपरि हो जाती
है। सुग्रीव एवं विभीषणकी शरणागतिमें प्रभुसे बिना पूछे ही इन्होंने दोनोंको
प्रवेशपत्र दे दिया; कारण कि वे अपने प्रभुसे इतने एकरूप हो चुके हैं कि
इनके विरुद्ध कभी कोई चेष्टा करते ही नहीं और श्रीरामजी भी आञ्जनेयका
अदब मानते हैं। यथा—सेवक स्योकाई जानि जानकीश मानै कानि
(ह.बा. १२)।
पैसारे शब्द पदसार शब्दका तद्भव है। पदेन पादेन सरणं सारः पदसारः
प्रवेश इत्यर्थः। यह शब्द प्रवेशके अर्थमें श्रीमानसजीमें भी प्रयुक्त हुआ है।
यथा—अति लघु रूप धरौं निशि नगर करौं पैसार (रा.च.मा. ५-३)।
भगवान्के अन्य द्वारपाल श्रीआञ्जनेयके समान नहीं देखे जाते। कहीं-
कहीं तो स्वामीको सूचित किए बिना ही प्रतिहार अपनी उच्छृङ्खलताके
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