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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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महावीरी व्याख्या चौ. २०: दुर्गम काज जगत के जे ते
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
दुर्गम काज जगत के जे ते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे ते ते ॥ २० ॥
शब्दार्थ—दुर्गम ▸ कठिन। सुगम ▸ सरल। अनुग्रह ▸ कृपा।
अर्थ—हे महावीरजी! संसारके जितने भी कठिन-से-भी-कठिन कार्य
हैं, वे सब आपकी कृपासे सरल हो जाते हैं।
व्याख्या—क्योंकि आप सुग्रीव तथा विभीषणके लिए तारण एवं स्वयं
तरण हैं तथा जटिल-से-जटिल कार्य आपने किया है। यथा—
मन को अगम तन सुगम किये कपीश
काज महाराज के समाज साज साजे हैं।
देव बंदीछोर रनरोर केसरी-किसोर
जुग जुग जग तेरे बिरद बिराजे हैं।
बीर बरजोर घटि जोर तुलसी की ओर
सुनि सकुचाने साधु खल-गन गाजे हैं।
बिगरी सँवारि अँजनीकुमार कीजे मोहि
जैसे होत आये हनुमान के निवाजे हैं॥
—ह.बा. १५
यहाँ आञ्जनेयके चरित्र-वर्णनका उपसंहार करके अब कृपाकी
आवश्यकताका उपपादन करते हैं।
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