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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. १९: प्रभु-मुद्रिका मेलि मुख माहीं महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
प्रभु-मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९ ॥
शब्दार्थ—मेलि ▸ डालकर। जलधि ▸ समुद्र।
अर्थ—प्रभो! आप श्रीरामजीकी दी हुई रामनामाङ्कित मुद्रिकाको मुखमें
लेकर शतयोजन-विस्तीर्ण समुद्रको लाँघ गए, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।
व्याख्या—दो शरणागतियोंमें प्रधान भूमिकाका निर्देश कर हनुमान्जीमें
तारणत्व गुणका वर्णन किया। अब तरणत्वका वर्णन कर रहे हैं। अर्थात्
हनुमान्जी सुग्रीव एवं विभीषणको सागरसे तारकर स्वयं भी तर जाते हैं।
सुग्रीवके लिए नाम-सेतु तथा विभीषणके लिए कृपा-सेतुकी व्यवस्था करते
हैं, एवं स्वयं प्रभु-मुद्रिकाको मुखमें लेकर राम-नामामृत चूसते हुए कौतुकमें
समुद्रको पार करते हैं। यथा—
कौतुक सिंधु नाघि तव लंका।
आयउ कपि-केहरी अशंका॥
—रा.च.मा. ६-३६-४
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