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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 65, कुल 110 में से

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पृष्ठ 65

महावीरी व्याख्या चौ. १८: जुग सहस्र जोजन पर भानू
ग्रसा था, विनयपत्रिका तथा हनुमान्-चालीसाके घटना-कल्पमें ग्रस लिया
था। देवताओंकी विनतीपर छोड़ा। सूर्यनारायणको ग्रसना असंभव नहीं है
क्योंकि कार्य कारणमें विलीन होते हैं। अतः तेजस्तत्त्व-रूप सूर्य वायुतत्त्व-
रूप हनुमान्में विलीन हों, यह अत्यन्त उचित है।
विशेष—मनुष्योंका एक चतुर्युग—जिसमें संध्या और संध्यांश
सहित १२,००० देववर्ष होते हैं—देवोंका एक युग कहलाता है।
यथा—एतद्द्वादशसाहस्रं देवानां युगमुच्यते (म.स्मृ. १-७१)।¹ तदनुसार
यहाँ प्रयुक्त जुग (संस्कृत: युग) शब्द ‘देवयुग’ वैकल्पिक अर्थ ग्रहण
करनेपर १२,०००की संख्याका वाचक हुआ। सहस्र शब्द १,०००का
वाचक है ही और जोजन (संस्कृत: योजन) शब्द ८ मीलका परिमाण
है।² इस प्रकार जुग सहस्र जोजनका एक और अर्थ हुआ १२,०००
सहस्र योजन—अर्थात् १,२०,००,००० योजन अथवा ९,६०,००,००० मील।
संभवतः यह ज्योतिषविद् गोस्वामी तुलसीदासजीके द्वारा दी हुई पृथ्वीसे
सूर्यकी दूरीकी गणना है।³ ऐसा भी प्रतीत होता है कि खगोलीय दूरियोंके
मापनमें समयकी इकाई (युग)का सर्वप्रथम प्रयोग गोस्वामीजीने ही किया
है।⁴
¹ इस श्लोकपर अपने मनुभाष्यमें मेधातिथिने मनुष्योंके द्वादश सहस्र चतुर्युगोंको देवोंका एक
युग कहा है, पर कुल्लूकभट्टने इस अर्थका सप्रमाण खण्डन करते हुए द्वादश सहस्र देववर्षों अर्थात्
एक चतुर्युगको ही देवयुग सिद्ध किया है—संपादक।
² Vaman Shivram Apte (1985) [1890]. The Practical Sanskrit-English
Dictionary (4th ed.). Delhi: Motilal Banarsidass, p. 789: “A measure of
distance equal to four Krosas or eight or nine miles.”—संपादक।
³सन् २०१२में पारित अन्ताराष्ट्रिय खगोलीय सङ्घके बी-२ प्रस्ताव के अनुसार सूर्यकी पृथ्वीसे
औसत दूरी ९,२९,५५,८०७ मील है। इस आधुनिक वैज्ञानिक मानसे उपर्युक्त संभावित मान ३.३
प्रतिशत अधिक है—संपादक।
⁴ प्रकाश-वर्ष (light-year) इकाईके सर्वप्रथम प्रयोगका श्रेय जर्मनीके वैज्ञानिक फ्रीड्रिश
बेसेल (१७८४–१८४६)को दिया जाता है—संपादक।
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