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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 110 में से

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महावीरी व्याख्या चौ. १८: जुग सहस्र जोजन पर भानू
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥
शब्दार्थ—जुग सहस्र जोजन ‣ जुग अर्थात् अनेक हजार योजन।
भानू ‣ सूर्य।
अर्थ—हे केसरीकुमार! धरातलसे हजारों योजन किंवा अनेकों हजार
योजन दूर ऊपर वर्तमान सूर्यनारायणको आपने अपने जन्मके एक दिन
बाद मधुर फलकी भ्रान्तिसे निगल लिया था।
व्याख्या—युग शब्दका युगल-पर्याय होनेसे ‘दो-दो’ एवं ‘एकसे
अनेक’ अर्थ भी होता है। वस्तुतः संस्कृतमें शतसे ऊपरकी
संख्याएँ अनन्तवाचिका होती हैं। यथा—शताधिकाः समाः संख्या
गेयाश्चानन्त्यवाचिकाः। इस दृष्टिसे जुग सहस्र जोजन का अर्थ होगा
‘अगणित योजन’। यह घटना संभवतः कार्तिक कृष्ण अमावस्याकी है।
अमावस्याको ही अपनी सन्धिमें राहु सूर्यग्रहणकी परिस्थिति प्रस्तुत करता
है। श्रीहनुमन्जीका प्राकट्य कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मङ्गलवारको प्रभात-
वेलामें मेष लग्न तथा स्वाति नक्षत्रमें श्रीअञ्जनाके गर्भसे हुआ था। यथा—
ऊर्जे कृष्णचतुर्दश्यां भौमे स्वात्यां कपीश्वरः।
मेषलग्नेऽञ्जनागर्भात्प्रादुर्भूतो स्वयं शिवः॥
—अ.सं.
वाल्मीकिके अनुसार सूर्यनारायणपर आञ्जनेयजीके आक्रमण ही की चर्चा
है तथा इन्द्रके द्वारा इनके वाम हनु (ठोड़ी) पर वज्रका प्रहार हुआ, पर उसमें
कोई विकृति नहीं आई। इसलिए प्राशस्त्य अर्थमें मतुप् प्रत्यय करके परम
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