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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. १७: तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना महावीरी व्याख्या
श्रीरामके दर्शन करा दूँगा।" यथा—
तब हनुमंत कहा सुनु भ्राता।
देखी चहउँ जानकी माता॥
—रा.च.मा. ५-८-४
तब विभीषणने एक युक्ति बताई कि आप मेरा अर्थात् विभीषणका रूप
धारण करके अशोकवाटिकामें प्रवेश करें। आपको कोई भी राक्षस पहचान
नहीं सकेगा क्योंकि अशोकवाटिकामें मैं अर्थात् विभीषण तथा रावण ये दो
ही पुरुष जा सकते हैं। हनुमान्जीने वैसा ही किया—
जुगुति बिभीषन सकल सुनाई।
चलेउ पवनसुत बिदा कराई॥
धरि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ।
बन अशोक सीता रह जहवाँ॥
—रा.च.मा. ५-८-५,६
विभीषणके इसी मन्त्रने (जिसे हनुमान्जीने माना) हनुमान्जीको सीताजीके
दर्शन करा दिये। उसके बदले हनुमान्जीने विभीषणको श्रीरामजीके दर्शन
कराकर उन्हें लङ्काधिपति बना दिया। इसीलिए गोस्वामीजीने कहा—जयति
भुवनैकभूषण विभीषणवरद (वि.प. २६-६)।
हनुमान्जीने सुग्रीव तथा विभीषण इन दो महानुभावोंको भगवान्‌से जोड़ा।
एकके यहाँ प्रभुको ले गए और एकको प्रभुके पास ले आए। सुग्रीवको
प्रभुका प्रभाव सुनाकर एवं विभीषणको प्रभुका स्वभाव समझाकर। उसी
प्रकार हम विषयी साधकोंको भी प्रभु-कृपाका अनुभव कराएँ।
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