श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. १७: तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥
शब्दार्थ—मंत्र ▸ भगवत्प्रपत्तिसिद्धान्त।
अर्थ—हे आञ्जनेय! विभीषणने आपके रामप्रेम-रूप मूलमन्त्रको
स्वीकारा। उसके परिणामस्वरूप वे लङ्काके कल्पान्त शासक स्वामी बन
गए। यह सारा संसार जानता है।
व्याख्या—विभीषणने लङ्कामें अपर रात्रिकालके प्रथम साक्षात्कारके
अनन्तर निराशा भरे स्वरमें आञ्जनेयसे कहा—
तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा।
करिहैं कृपा भानुकुल-नाथा॥
—रा.च.मा. ५-७-२
अर्थात् भानुकुलनाथ श्रीरामने भानुपुत्र सुग्रीवपर कृपाकी क्योंकि वह उनके
कुलप्रवर्तकका पुत्र है, पर मुझमें कोई पात्रता नहीं है। श्रीआञ्जनेयने कहा,
“विभीषण! भगवत्स्मरण ही उनकी कृपाका एकमात्र असाधारण साधन
है।” यथा—
जानतहूँ अस स्वामि बिसारी।
फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी॥
—रा.च.मा. ५-८-१
इसी मन्त्रने विभीषणको लङ्केश्वर बना दिया। अथवा, श्रीहनुमान्जीने
विभीषणजीसे कहा, “विभीषण! पिताके बिना तुम अधूरे हो और माताके
बिना मैं अधूरा हूँ। तुम मुझे सीता माताके दर्शन करा दो और मैं तुम्हें पिता
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