श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. १३: सहसबदन तुम्हरो जस गावैं
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
सहसबदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ १३ ॥
शब्दार्थ—सहसबदन ▸ शेष। श्रीपति ▸ सीतापति श्रीराम।
अर्थ—सहस्र मुख वाले शेष तुम्हारा यश गाते हैं तथा गाते रहेंगे। ऐसा
कहकर श्रीसीताके पति श्रीराम हनुमान्जीको बार-बार गलेसे लगा रहे हैं।
व्याख्या—श्रीहनुमान्जीकी यह ध्यान-झाँकी श्रीलक्ष्मण-मूर्च्छा-
समाप्तिके पश्चात्-कालकी है। श्रीलक्ष्मणजीको मूर्च्छामुक्त देखकर उन्मुक्त
कण्ठसे प्रशंसा कर श्रीराघवजीने हनुमान्जीको गलेसे लगा लिया।
सहसबदन यहाँ श्रीलक्ष्मणजीके लिए अभिप्रेत है। यथा—
शेष सहस्र शीष जग कारन।
जो अवतरेउ भूमि भय दारन॥
—रा.च.मा. १-१७-७
भाव यह है कि आञ्जनेय! तुम्हारे इस परम पावन यशको सहस्रमुख
शेषावतार श्रीलक्ष्मण भी गाते रहेंगे, क्योंकि रणशय्यापर शान्त हुए अनन्तको
भी तुमने जीवनदान दिया।
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