श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. १०: भीम रूप धरि असुर सँहारे
सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं।
जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥
—रा.च.मा. ५-४४-२
श्रीरघुनाथजी समस्त प्राणिमात्रके सम्मुख होकर भी, यथा—सन्मुख
सब की ओर (रा.च.मा. ३-१२), जीवकी सम्मुखताके बिना उसका
कल्याण नहीं कर सकते। अतः गोस्वामीजी यह अनुरोध करते हैं कि अनादि
कालसे भगवत्पाद-पद्म-विमुख इस जड़ जीवको श्रीमन्मारुतिके बिना कौन
श्रीराम-सम्मुख कर सकता है? यथा—
आते आञ्जनेय न जो व्याकुल धरा पै आज
क्षुधित जनों को भक्ति-अमिय पिलाता कौन।
कौन दर्शाता रामधाम का पवित्र पंथ
राम-नाम-मञ्जु-मणिदीपक जलाता कौन।
कौन सरसाता उर-भाव-सरसीरुह को
राम-प्रेम मधुर सुमोदक खिलाता कौन।
राम-गुण गायक बनाता कौन गिरिधर को
मुझ-से पतित को पथ सुमति दिलाता कौन॥
आते आञ्जनेय जो न अमल अवनि पै आज
वैष्णवों की विजय-वैजयन्ती फहराता कौन।
कौन लाँघ जाता शतयोजन पयोनिधि को
मैथिली का विरह-दवानल बुझाता कौन।
कौन लिपटाता रघुबीर-पद-पङ्कज में
राजीव-नयन के नयन-नीर से नहाता कौन।
साधन-विहीन दृगहीन मूढ़ गिरिधर को
मानस-मन्दाकिनी में मज्जन कराता कौन॥
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