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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. १०: भीम रूप धरि असुर सँहारे महावीरी व्याख्या
अर्थात् “हे भीम! स्वर्गकी श्रेष्ठ अप्सराएँ एवं तुम्बुरु आदि कुशलगायक
गन्धर्व भगवान् श्रीराघवके चारु चरितको गाते हुए मुझे परमानन्द-सुधा-
सागरमें मग्न किए रहते हैं।” जानेसे पहले भीमने उनके मौलिक रूपको
देखनेकी इच्छा प्रकट की। तब श्रीहनुमान्जीने अपना स्वर्णशैल-संकाश
शरीर प्रस्तुत किया, जिसे देखकर भीमने आँखें बन्द कर लीं। यह कथा
महाभारतके वनपर्वमें स्पष्ट है। इसीका उद्धरण गोस्वामीजीने कवितावलीमें
प्रस्तुत किया है—कौनके तेज बलसीम भट भीम-से भीमता निरखि
कर नयन ढाँके (क. ६-४५)।
असुर सँहारे—असुर-संहारका क्या कहना! आञ्जनेयके संग्रामकी
प्रशंसा श्रीरामचन्द्र स्वयं करते हैं—
हाथिन सों हाथी मारे घोरे सों सँघारे घोरे
रथन सों रथ बिदरनि बलवान की।
चंचल चपेट चोट-चरन चकोट चाहे
हहरानि फौजें बहरानी जातुधान की।
बार बार सेवक-सराहना करत राम
तुलसी सराहै रीति साहिब सुजान की।
लाँबी लूम लसत लपेटि पटकत भट
देखौ देखौ लखन लरनि हनुमान की॥
—क. ६-४०
रामचंद्र के काज संवारे—श्रीरामजीके समस्त कार्योंको हनुमान्जीने
सजा दिया। भाव यह है कि रावणादिका वध राघवकी इच्छासे हो सकता
था, पर विभीषणादिका उद्धार आञ्जनेयके बिना कथमपि संभव नहीं था।
कारण कि जब तक जीव रघुनाथजीके सम्मुख नहीं होता, तब तक उसके
पाप नष्ट नहीं होते। यथा—
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