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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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महावीरी व्याख्या चौ. ९: सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥
शब्दार्थ—बिकट ▸ भयंकर।
अर्थ—हे मारुते! आपने सूक्ष्म अर्थात् अत्यन्त लघु बन्दरका रूप धारण
करके माता सीताको दिखाया और भयंकर रूप धारण करके रावणकी नगरी
लङ्काको भस्मसात् कर दिया।
व्याख्या—अशोकवाटिकामें हनुमान्‌जीका इतना लघुतम रूप हुआ कि
उन्होंने अपनेको वृक्षके पल्लवोंमें छिपा रक्खा—
तरु-पल्लव महँ रहा लुकाई।
करइ बिचार करौं का भाई॥
—रा.च.मा. ५-९-१
अध्यात्म-रामायणमें इन्हें कलविङ्कसमाकारः (अ.रा. ५-३-२०) कहा
गया है, अर्थात् छोटी गौरैयाके समान इनका आकार था। यहाँ यह शङ्का
करना निरर्थक है कि मुद्रिका कहाँ रही होगी। मुद्रिका भगवान्‌के श्रीविग्रहका
आभूषण होनेसे चिन्मय है। अतः परिस्थितिके अनुसार लघुता एवं गौरव
उसके लिए सहज है। गीतावलीजीमें सीता-मुद्रिका-संवाद भी वर्णित है।
मुद्रिका स्पष्ट कहती है—नींद भूख न देवरहि परिहरे को पछिताउ (गी.
५-४-२)। जो मुद्रिका श्रीसीताजीको श्रीराघवके समाचार सुना सकती है,
उसकी लघुता एवं गुरुताके विषयमें संदेहको स्थान ही कहाँ? हनुमान्‌जीके
लघु रूपको देखकर श्रीसीताजीको लीलापक्षमें संदेह हो गया। पुनः उन्होंने
भीम रूपकी झाँकीसे मैथिलीके संदेहको दूर किया। यथा—
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