श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
DevanagariHindipublished110 पृष्ठ
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चौ. ९: सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा महावीरी व्याख्या
मोरे हृदय परम संदेहा।
सुनि कपि प्रगट कीन्ह निज देहा॥
कनक-भूधराकार शरीरा।
समर-भयंकर अतिबल बीरा॥
सीता मन भरोस तब भयऊ।
पुनि लघु रूप पवनसुत लयऊ॥
—रा.च.मा. ५-१६-७,८,९
बिकट रूप धरि लंक जरावा—लङ्कादहनमें तो इनका विकट रूप
प्रसिद्ध ही है। विशेष कवितावलीका सुन्दरकाण्ड द्रष्टव्य है। इसी अवसरपर
रावणको अपना रुद्ररूप प्रदर्शित करने हेतु हनुमान्जीने अपना पञ्चमुखी रूप
प्रदर्शित किया।
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