श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. ६: शंकर स्वयं केसरीनंदन
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
शंकर स्वयं केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग-बंदन॥ ६ ॥
शब्दार्थ—स्वयं ▸ साक्षात्।
अर्थ—हे प्रभो! आप साक्षात् श्रीशंकर भगवान् अर्थात् उनके अभिन्न
अंश तथा केसरीके नन्दन (क्षेत्रज पुत्र) हैं। आपका तेज एवं प्रताप महान्
है तथा आप संपूर्ण जगत्के द्वारा वन्दित हैं।
व्याख्या—अर्थात् स्वयं शिव ही केसरीनन्दनके रूपमें पधारे।
यथा—रुद्र-अवतार संसार-पाता (वि.प. २५-३)। शंकर स्वयं
केसरीनंदन यह प्रसंग अद्यावधि बहुतसे जिज्ञासुओंकी जिज्ञासा एवं अनेक
शङ्कालुओंकी शङ्काका केन्द्र-बिन्दु बना रहा है क्योंकि एक ही हनुमान्जी
महाराजको पवनसुत एवं केसरीनंदन शब्दसे अभिहित किया गया है। एक
पुत्रके दो पिता कैसे संभव हैं? पर इसका समाधान श्रीराघवकी कृपासे
अत्यन्त सरल एवं सुबोध है। सौभाग्यका विषय है कि श्रीहनुमान्जीके न
केवल दो अपितु तीन पिताओंका प्रमाण हनुमान्-चालीसामें ही प्राप्त हो जाता
है—
(१) पवनसुत-नामा (ह.चा. २)
(२) केसरीनंदन (ह.चा. ६)
(३) राम-दुलारे (ह.चा. ३०)
इसका उत्तर यह है कि श्रीहनुमान्जी श्रीपवनके औरस पुत्र हैं।
यथा—मारुतस्यौरसः पुत्रः (वा.रा. ४-६६-७)। क्योंकि वायुदेवने ही
साक्षात् शिवके तेजको अञ्जनाके गर्भमें समाहित किया था, क्योंकि उनके
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