श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
पृष्ठ 40, कुल 110 में से
संदर्भ में पढ़ेंचौ. ५: हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै महावीरी व्याख्या
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज-जनेऊ छाजै॥ ५॥
शब्दार्थ—छाजै ▸ शोभित हो रहा है।
अर्थ—हे आञ्जनेय! आपके वज्रवत् सुदृढ हस्तमें श्रीरामकी विजय-
ध्वजा विराज रही है एवं आपके स्कन्धपर मूँजका यज्ञोपवीत शोभित हो
रहा है।
व्याख्या—यह झाँकी श्रीभरतजीके समक्ष ब्राह्मण-वेषमें पधारे हुए
श्रीआञ्जनेयकी है। इनके हाथमें श्रीराघवजीकी विजय-वैजयन्ती फहरा रही
है। यथा—भानुकुल-भानु-कीरति-पताका (वि.प. २६-६)। काँधेपर
मूँजका यज्ञोपवीत आञ्जनेयके अखण्ड ब्रह्मचर्यको सूचित करता है।
अथवा, इनके हाथमें वज्रके समान शत्रुदल-नाशिनी गदा एवं वैष्णव
विजय-ध्वजा विराजमान हैं। इस व्याख्यासे व्यञ्जित हनुमान्जीका गदाधारण
ध्वनित होता है।
२६