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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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चौ. ३: महाबीर बिक्रम बजरंगी महावीरी व्याख्या
महाबीर बिनवउँ हनुमाना।
राम जासु जस आपु बखाना॥
—रा.च.मा. १-१७-१०
बिक्रम—इनका साधना-क्रम विशिष्ट है। इसलिए ये भगवान् श्रीरामको
पीठ तथा हृदयपर आसीन करते हैं। यथा—लिए दुऔ जन पीठ चढ़ाई
(रा.च.मा. ४-४-५) और चलेउ हृदय धरि कृपानिधाना (रा.च.मा.
५-२३-१२)। यद्वा, इनके समुद्र-लङ्घनकी क्रिया भी बहुत विशिष्ट है। स्वयं
कहते हैं—लीलहिं नाँघउ जलधि अपारा (रा.च.मा. ४-३०-८)। मैनाक,
सुरसा, एवं सिंहिका जैसे विघ्नोंके प्रस्तुत होनेपर भी इनका वेग विहत नहीं
हुआ। यथा—
विषण्णा हरयः सर्वे हनूमन् किमुपेक्षसे।
विक्रमस्व महावेग विष्णुस्त्रीन् विक्रमानिव॥
—वा.रा. ४-६६-३७
अर्थात् "हे हनुमान्! संपूर्ण वानर बहुत दुःखी हैं, उनकी उपेक्षा क्यों
करते हो? जिस प्रकार भगवान् विष्णुने तीन बार चरणका विक्षेप करके
समस्त लोकोंको नाप लिया था, उसी प्रकार एक बार समुद्र लाँघनेके लिए
अपने चरणका विक्षेप करो।" अतः यहाँ बिक्रमका अर्थ है विशेष प्रकारके
चरण-विक्षेपकी प्रक्रिया, जिसकी एक छलाँगसे भी कम हो गया भूमण्डलसे
सुदूर नभोमण्डलका परिमाण! यथा—बानर सुभाय बालकेलि भूमि
भानु लागि फलँगु फलाँगहूँ ते घाटि नभतल भो (ह.बा. ५)।
बजरंगी—यह शब्द वज्राङ्गीका तद्भव है। जन्म लेनेके एक दिनके
ही पश्चात्, अर्थात् कार्तिक कृष्ण अमावस्याको, प्रातःकाल क्षुधासे पीड़ित
हनुमान्जी महाराजने लाल फलकी भ्रान्तिसे सूर्यनारायणके ऊपर आक्रमण
कर दिया। उसी समय राहु सूर्यनारायणको ग्रसने हेतु वहाँ उपस्थित था।
हनुमान्जीने सूर्यको छोड़कर राहुपर ही आक्रमण कर दिया। अनन्तर राहुसे
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