श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. २: राम-दूत अतुलित-बल-धामा
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
राम-दूत अतुलित-बल-धामा।
अंजनिपुत्र - पवनसुत - नामा॥ २ ॥
शब्दार्थ—अतुलित-बल-धामा ▸ अतुलनीय बलके आश्रय।
अर्थ—आप श्रीरामजीके विश्वस्त दूत तथा अतुलनीय बलके आश्रय हैं
तथा आप अञ्जनीपुत्र एवं पवनपुत्र नामसे प्रसिद्ध हैं।
व्याख्या—श्रीहनुमान्जी श्रीराघवके अन्तरङ्गतम दूत हैं। अतः
श्रीसीताजीके प्रति गोपनीय संदेशवाहकका कार्य इन्हींको सौंपा गया।
यथा—
बहु प्रकार सीतहिं समुझाएहु।
कहि बल बीर बेगि तुम आएहु॥
—रा.च.मा. ४-२३-११
सुन्दरकाण्डमें ये श्रीसीताजीके समक्ष स्वयं कहते हैं—रामदूत मैं मातु
जानकी (रा.च.मा. ५-१३-९), और प्रामाणिकताके लिए करुणानिधानकी
शपथ करते हैं—सत्य शपथ करुनानिधान की (रा.च.मा. ५-१३-९)।
भाव यह है कि मुझमें दूत बननेकी कोई पात्रता न होनेपर भी करुणानिधानकी
करुणाने यह महत्त्वपूर्ण पद दे दिया।
अतुलित-बल-धामा—हनुमान्जी अतुलनीय बलके आश्रय हैं ही,
यथा—तेरे बल बानर जिताये रन रावन सों (ह.बा. ३३)। अथवा
अतुलित बलशाली भगवान् श्रीराम हैं, यथा—अतुलित बल अतुलित
प्रभुताई (रा.च.मा. ३-२-१२)। उनके भी आश्रय हैं श्रीहनुमान्जी।
यथा—चलेउ हरषि हिय धरि रघुनाथा (रा.च.मा. ५-१-४)।
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