श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या चौ. १: जय हनुमान ज्ञान-गुण-सागर
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
जय हनुमान ज्ञान-गुण-सागर।
जय कपीश तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥
शब्दार्थ—उजागर (उज्जागर) ▸ प्रसिद्ध।
अर्थ—समस्त शास्त्रीय ज्ञान एवं गुणोंके समुद्र श्रीहनुमान्जी! आपकी
जय हो! हे तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध वानरोंमें श्रेष्ठ आञ्जनेय! आपकी जय हो!
व्याख्या—इस चौपाईके पूर्वार्धमें श्रीहनुमान्जीके पारलौकिक उत्कर्ष
तथा उत्तरार्धमें लौकिक आदर्शका वर्णन करते हैं। श्रीहनुमान्जी समस्त
शास्त्रोंके ज्ञाता हैं। श्रीमद्वाल्मीकीय-रामायणके किष्किन्धाकाण्डमें भगवान्
श्रीराम इनके अलौकिक ज्ञानकी प्रशंसा करते हैं—
नानृग्वेदविनीतस्य नायजुर्वेदधारिणः।
नासामवेदविदुषः शक्यमेवं प्रभाषितुम्॥
नूनं व्याकरणं कृत्स्नमनेन विधिना श्रुतम्।
बहुव्याहरताऽनेन न किञ्चिदपशब्दितम्॥
—वा.रा. ४-३-२८,२९
श्रीरामचन्द्रजी प्रशंसाके स्वरमें कहते हैं, “जिसने ऋग्वेदकी पूर्ण शिक्षा नहीं
पाई तथा जिसने यजुर्वेदको अर्थतः धारण नहीं किया तथा जो सामवेदका
विद्वान् नहीं, वह इस प्रकारका भाषण कभी भी नहीं कर सकता। निश्चित ही
संपूर्ण व्याकरण इसने विधिवत् सुना है क्योंकि धाराप्रवाहसे बोलता हुआ
यह विद्यार्थी कहीं भी एक भी अक्षर अशुद्ध नहीं बोला।”
तिहुँ लोक उजागर—हनुमान्जी रुद्रावतार होनेसे तथा जल, थल, एवं
नभमें अव्याहतगति होनेके कारण तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध हैं।
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