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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 110 में से

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दो. २: बुद्धि-हीन तनु जानिकै महावीरी व्याख्या
(३) बिद्या (संस्कृत:विद्या)—यहाँ विद्या विनयसंपन्ना अपेक्षित है, जो
भगवत्संबन्धका विवेक उत्पन्न करके जीवको राघवके चरण-कमलसे जोड़
दे। यथा—सा विद्या या विमुक्तये (वि.पु. १-१९-४१)। अपि च—
बिद्या बिनु बिबेक उपजाए।
श्रम फल पढ़े किए अरु पाए॥
—रा.च.मा. ३-२१-९
अर्थात् श्रीआञ्जनेय बल, बुद्धि, एवं अध्यात्म-विद्यासे भगवान्‌के सौन्दर्य,
ऐश्वर्य, एवं माधुर्यकी अनुभूतिका सामर्थ्य दें।
क्लेश पाँच होते हैं—अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, और अभिनिवेश
(मरण)। यथा—अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः पञ्च क्लेशाः (यो.सू.
२-३)। विकार छः कहे जाते हैं—काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, एवं
मात्सर्य। यथा—षट-बिकार-जित अनघ अकामा (रा.च.मा. ३-४७-
७)। इस प्रकार पञ्च क्लेशों और षट् विकारोंका योग ग्यारह (११) हुआ
और आप एकादशरुद्रमय हैं। यथा—रुद्र-अवतार संसार-पाता (वि.प.
२५-३)। अतः मेरे इन एकादश शत्रुओंको समाप्त करें।
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