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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 110 में से

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पृष्ठ 23

महावीरी व्याख्या आमुख
हनुमान्-बीसा कहना उचित होगा; जबकि तुलसीदासजीने स्वयं हनुमान्-
चालीसा कहा है, यथा—जो यह पढ़ै हनुमान-चलीसा (ह.चा. ३९)।
श्रीमानसजीमें भी जहाँ-जहाँ विषम संख्यापर पङ्क्ति आई है, उस प्रत्येक
पङ्क्तिको प्रत्येक टीकाकारने स्वतन्त्र चौपाईके रूपमें मानकर उसकी टीका
की है। उदाहरणार्थ—
(१) बालकाण्ड २-१३
अकथ अलौकिक तीरथराऊ।
देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ॥
(२) अयोध्याकाण्ड ८-७
गावहिं मंगल कोकिलबयनी।
बिधुबदनी मृगशावक-नयनी॥
(३) अरण्यकाण्ड १२-१४ (कुछ प्रतियोंमें १२-१३)
जहँ लगि रहे अपर मुनि-बृंदा।
हरषे सब बिलोकि सुखकंदा॥
(४) किष्किन्धाकाण्ड १०-५
मम लोचन-गोचर सोइ आवा।
बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा॥
(५) सुन्दरकाण्ड १-९
जलनिधि रघुपति दूत बिचारी।
कह मैनाक होहु श्रमहारी॥
(६) युद्धकाण्ड ८०-११
सखा धर्ममय अस रथ जाके।
जीतन कहँ न कतहूँ रिपु ताके॥
(७) उत्तरकाण्ड ६४-९
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