श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहावीरी व्याख्या आमुख
हनुमान्-बीसा कहना उचित होगा; जबकि तुलसीदासजीने स्वयं हनुमान्-
चालीसा कहा है, यथा—जो यह पढ़ै हनुमान-चलीसा (ह.चा. ३९)।
श्रीमानसजीमें भी जहाँ-जहाँ विषम संख्यापर पङ्क्ति आई है, उस प्रत्येक
पङ्क्तिको प्रत्येक टीकाकारने स्वतन्त्र चौपाईके रूपमें मानकर उसकी टीका
की है। उदाहरणार्थ—
(१) बालकाण्ड २-१३
अकथ अलौकिक तीरथराऊ।
देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ॥
(२) अयोध्याकाण्ड ८-७
गावहिं मंगल कोकिलबयनी।
बिधुबदनी मृगशावक-नयनी॥
(३) अरण्यकाण्ड १२-१४ (कुछ प्रतियोंमें १२-१३)
जहँ लगि रहे अपर मुनि-बृंदा।
हरषे सब बिलोकि सुखकंदा॥
(४) किष्किन्धाकाण्ड १०-५
मम लोचन-गोचर सोइ आवा।
बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा॥
(५) सुन्दरकाण्ड १-९
जलनिधि रघुपति दूत बिचारी।
कह मैनाक होहु श्रमहारी॥
(६) युद्धकाण्ड ८०-११
सखा धर्ममय अस रथ जाके।
जीतन कहँ न कतहूँ रिपु ताके॥
(७) उत्तरकाण्ड ६४-९
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